#चेहरा 🌹राज छिपे चेहरों के🌹
दिवाली की रात है,
जाने क्या गज़ब ढाने गई है वो।
लौट के कब आएगी,
चंद तोहफे लाएगी।
भूख प्यास से,
बिलख रही थी,
उससे जुड़ी जिंदगीया
अरमानों की सूखी पड़ी थी अमराईया
आरजूए खोई थी अंधेरी गुफाओं में,
पर अचानक,
कुछ पल में बजने लगी
खुशियों की वहां शहनाइयां,
कुछ पाने के लिए,
क्या खोकर है वो आई,
पेट भरने गई थी,
पर शायद कोख,
मैं कालिख भर लाई,
इस बात से अंजान
है सब,
खुश खुश हो गए,
चंद पलों की
उधार मिली खुशियों
के मेले में,
किसके चेहरे को,
पढ़ा जाए
किसके दर्द का
मातम मनाया जाए
और किसकी खुशियों की
नजर उतारी जाए
इस बात से
हर एक चेहरा,
दूसरे चेहरे से,
शायद जानबूझकर,
अनजान है
हां शायद सभी जानते हैं
फिर भी अनदेखा
कर रहे हैं,
डॉ प्रियंका सोनी "प्रीत"