My New Poem ...!!!
यारों कुदरत भी क्या कमाल करती है
हर लम्हें हर पल का हिसाब रखती है
किसने कितनी साँस ली कितनी छोड़ी
हर-एक मखलुक़ का ख़्याल रखती हैं
किसने क्या लिया है किसने क्या दिया
हर-एक हिसाब की मालूमात रखती है
न जाने क्या है उसकी किताब में यारों
मासूम चेहरों को ही वह उदास करती है
बद-अमलवालो को बेहिसाब दौलत से
नवाज़ देती,पर कसौटी सच की लेती हैं
पारस-ओ-इम्तिहानों पर रगड़ रगड़ के
सच्चे को माटी से सोना तो बना देती हैं
पर बख़्शने पर आ जाए तो यही क़ुदरत
उसे ही कुन्दन-सा पाकीज़ा बना देती हैं
✍️🥀🌹🌲🌺🌺🌲🌹🥀✍️