My New Poem...!!!
फर्क सिर्फ आपकी सोच का हैं साहब,
सकारात्मकता या नकारात्मकता भी
आपकी सोच की ही अभिन्न पहेली है
वर्ना सीढ़ियाँ तो वही की वही होती है
पर जो किसी के लिए तो ऊपर जाती हैं
और वो किसी के लिए नीचेको आती हैं
यारों ग़ुस्सा भी तो हिस्सा ही है सोच का
किसी को क़ाबू कर बचना गँवारा है तो
किसी को जता के बर्बाद होना आता है
सोच को भी ग़र ढंग से सोचा जाएँ तो
अनगिनत मसले चुटकीमें ख़त्म हो जाएँ
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