#Freedom
ये कहानी हैं एक फौजी के घर की🏡, जहाँ हर एक मर्द जाता था देश की सेवा में.. 🚶
और एक दिन..🕐
"हा, आप आ रहे हो में आप के पसंद का खाना बनाउंगी "(माँ )☎️
"युवराज, तेरे पापा कल आ रहे है |"
ये सुन कर में होश में न रहा, क्यूँ की लोगों के पापा हीरो होंगे पर मेरेलिए मेरे पापा सुपर हीरो है, औऱ वो मुझसे मिलने आ रहे है |
आये वो घर पे,
गुज़ारा हम सब ने वक्त साथ में, 👨👩👦
पर एक दिन आ गया पैगाम जंग का और चले गये आधी रात में, 🌃
गुज़रते वक्त में हम जलाते रहे दिये ♨️उनकी सलामती के.
एक दिन आया जिसका कीसी को इंतज़ार नहीं था |
आये अपने दोस्तों के साथ,
वो तो मुस्कुरा रहे थे पर नम थी उनके यारो की आँख,
लिपटे थे तिरंगे🇮🇳 में औऱ नाम के आगे लगाया शहीदी का खिताब,⚰️
चिठ्ठी छोड़ कर बतायी आपनी ख्वाहिश की एक आश, 😇
"बेटा, में वादा करके आया हूँ माँ से के आयेगा सेवक मेरे घर से. "
कुछ साल बाद...
(army recruitment test)
वेदांत: रेशमा (मेरी पत्नी )सुनो,आज का दिन काफ़ी important है, जल्दी करो, तेरे ऑफिस के चकर में, में late न हो जाऊ |😒
माँ :ये ले मुँह मीठा करले आज तु अपने पापा का सपना पूरा करने जा रहा है |😇
निशा (मेरी बेटी ):all the best papa (प्यारी छोटी सी मुस्कान के साथ☺️ )
रेशमा :हमें पता है आप कर लोगे, papa का सपना ज़रूर पूरा होगा, हम सब आपके साथ है |
में औऱ रेशमा निकल गये,मेरे ज़हन में चल रहा था पापा का सपना औऱ उनकी बाते, पापा का सपना पूरा होना ये कायनात को शायद उस वक्त मंज़ूर नहीं था | औऱ हुआ हत्सा औऱ छिन लिए पैर औऱ पटक दिया मुझे सपनों के सफर से बहार 👣
2 साल बाद.. 📆
आखिर कार पापा का सपना पूरा होगा, हम सब ख़ुश थे पर साथ ही साथ आँखे भी नम थी, पापा के सपनों की ट्रैन आ गयी थी लेने... 🚇
ट्रैन जाने लगी औऱ चल पड़ी पापा के सपनों की औऱ.. 🚈
हम सबको वो बोहोत याद आयेगी...
(मुझे रेशमा की बात याद आने लगी, जिस दिन में निराश हो कर अपने खोये हुई पैर और सपने ना पूरे कर पानेवाली परेशानी से जुंज रहा था |
"पापा का सपना आप पूरा करो या में क्या फरक पड़ता है, पापा का सपना पूरा तो होगा, आखिर कार वो मेरे भी पापा थे |)
निशा : we miss you mumma.. ❤️
वेदांत : l love you रेशमा❤️
देश की सेवा लड़की करें या कोई लड़का क्या फर्क पड़ता है |