आजादी, आजादी की सब बात कर रहे हैं
लेकिन हमें किस से आजादी चाहिए
कौन दे सकता है हमें आजादी
इतना पढ़ने-लिखने के बाद भी
हम धर्म, जात, वंश, देश और खोखली
होती परम्परा और सोच से
बंधे बस आज़ादी, आजादी
चिल्लाए जा रहे हैं
और इस अन्धी दौड़ में
इंसान और इंसानियत कहीं
खोती जा रही है ।
जब हमने खुद ही खुद को बांध रखा है
तो हमें आजादी देगा कौन
दे सकता है कौन.......
उत्तर केवल एक- हम खुद
हमें खुद से आजादी चाहिये
#आजादी