*हरि हरि रे हरिया वेल,*
*डावे कवले चम्पा वेल।*
कोकड़ माय जाड़ बूट,
इण घर इतरा घोड़ा ऊंट।।
*इण घर इतरी गायों भैयों,*
*इण घर इतरी टिंगडियों।*
इण घर जाया लाडल पुत,
छोटी कुलड़ी चमक चणा।।
*डावे हाथ लपुकों ले,*
*जीमणे हाथ चंवर ढोलाव।*
ज्यों ज्यों चम्पो लेहरों ले,
डावे हाथ लेहरियों ले।।
*सात हवाणी जणा पच्चास,*
*गेरीयो रो पूरो हास।*
घर धणयोंणी बारे आव,
गुडरी भेली लेती आव।।
*साकलियों रो डालो लाव,*
*गेरीयों री आस पुराव।*
गेरिया आया थारे द्वार,
हरि हरि रे हरिया ढूंड।।
*हो........* हो........
_हासो मोटो ताजो रेईजे।_
हैप्पी ढूंढ़ोत्सव
ये वो मारवाड़ी शब्दोच्चार हे,जो बालक की प्रथम ढूंढ़ पर गेरियों द्वारा गाया जाता हे। हमारी संस्कृति और उल्लास का प्रतीक।
रंगोत्सव की हार्दिक शुभकामनाये।
*प्रेषक*
#आजाद