मेरी कल्पना का देश
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न कर हिन्दू-मुसलमान ऐ फकीर।
सब एक है देखले क्या गरीब क्या अमीर।।
एक है रंग लाल खून सबका।
चाहे वो है राजा या आम इंसान जमीन का।।
तिरंगे में वो लिपटा सलीम भी शमसेर भी है।
वो एक रामकृष्ण एक पीर अजमेर भी है।।
ये संस्कृति है मेरे भारत की।
दिलमे वतन पे मरमिटने की दाज भी।।
वो साई वो पयंगबर कहे गए सब एक है।
उनके विचार भी तो नेक है।।
बस करे मेरे भाइयो धर्म का दिखवा।
ये जान ले यहा सभी धर्म एक है।
भावु ग जादव