एक मस्जिद के गिरने पर पुरे मुल्क को आग में जलाना,
रामभक्तों से भरे ट्रेन के डिब्बे को सुलगाना,
याद रखा गया है,सब याद रखा गया है..
ज़हर पिलाकर बड़ा किया था तुमको जिन सपेरों ने
आज उनके सर से ताज उतर गया है..
याद रखा गया है,सब याद रखा गया है...
वादियों के वतनीओ को मार के अपने ही घर से भगाना,
उन मासूमों पर बेइंतेहा जुल्म ढाना,
याद रखा गया है,सब याद रखा गया है...
अपने ही घर में बेघर बने उन पंडितो के दर्द पर
मरहम लगानेवाला हक़ीम अब आ गया है..
याद रखा गया है सब कुछ याद रखा गया है...
रात के अंधेरो में उन दुश्मनो को पनाह देना,
और उनके इरादों में जान भरना,
याद रखा गया है,सब याद रखा गया है..
बार बार की हुई गलतियों को भी,
बड़े भाई की हैसियत से नजरअंदाज करना,
अब हद से पार हो गया है,सब याद रखा गया है..
कौन से इंक़लाब की बात करते हो तुम,
तुम्हे हमेशा जरुरत से ज्यादा दिया गया है,
याद रखा गया है,सब कुछ याद रखा गया है...
ज्यादा उछलने से कुछ हांसिल होने वाला नहीं है,
अब थोड़ा वतनपरस्ती दिखाने क वक़्त आ गया है,
वर्ना याद तो रखा ही गया है,सब याद रखा गया है...