***पति बचाओ***
मेरे जीवन का कागज़, देखो रह गया कोरा
गेंहू सारे चूहे खा गए, बाकी रह गया बोरा।
गेंहू सारा चूहे खा गए बोरा रह गया बाकी
हाथ मे बेलन लेके देखो भौजी उधर से झांकी।
भौजी उधर से झांकी भईया हो गयी पेला पेली
भईया अपनी टांग पकड़ के खून से खेलें होली।
दीवाली में होली देख के शर्मा जी कुछ बोले
गुप्ता जी भी तब तक आ गए आते ही यूं बोले
देखो भाई बन्धु मिलकर यूनियन एक बनाओ
नाम रखो फिर उस यूनियन का "पति बचाओ"।
कब तक ज़ुल्म सहोगे भईया अब आवाज़ उठाओ
घर का दरवाज़ा बाद में, पहले कोर्ट खटखटाओ।
जनहित में ये काम करो तो आने वाली पीढ़ी
देंगी तुमको हुक्का पानी तम्बाकू और बीड़ी।।
-सिराज अंसारी