कुछ पल को साथ था , कुछ पल को पराया हो गया
हाँ समय भी आजकल , मेहबूब सा हो गया
जब दिल से चाहा इसे , खुशिया हज़ार दी
जरा सा गौर ना किया तो , तबाह कर गया
हाँ समय भी आजकल , मेहबूब सा हो गया
हर बार संभाला मैने उसे , हर बार शिद्दत से साथ दिया
पर जरासी फुरसत से वो , मुझे आवारा बना गया
हाँ समय भी आजकल , मेहबूब सा हो गया
कुछ ख़ासियत भी इसमें मेहबूब वाली है ,
दिल से चाहो तो इस से भी वफ़ा मिलने वाली है
इबादत सजदे रोज किया करो इसके तो
ये मोहब्बत भी फिर रंग लाने वाली है
जिसने दगा देना चाहा , खुद बेसहारा हो गया
समय भी यारो , मेहबूब सा हो गया
है करीब तो इज्जत रखलो , न होने पर सवाल बहोत करोगे
वक़्त रहते रिश्ते बनालो , वक़्त से बहोत रिश्ते है टूटे
एहमियत इसकी खोने के बाद ही तो है पता चलती
बचपन की यादें सिर्फ मुझे ही तो उदास नही करती
याद करते बैठोगे कल को , वही जो पल गुजर गया
समय भी यारो , मेहबूब सा हो गया
हाँ मोहब्बत भी ऐसी जो , अधूरी हो रही है
मेरा होकर भी मेरा नही ऐसे हालत जो हो चुकी है
समय को बाँधना भी तो मेरे हाथों में नही
प्यार की तरह बस एक उम्मीद ही तो रहती है
मोहब्बत में अपनी शिद्दत से ही हूँ निभा रहा
वक़्त का इंतजार नही , वक़्त को हूँ जी रहा
मेरी खुशियो मेरी गमो में मेरा हमसफ़र हो गया
हा समय भी आज कल मेहबूब सा हो गया