My New Poem ....!!!!
बड़ी ही खूबसूरत शाम थी
वो तेरे साथ की …
अब तक “खुशबू” नही गई,
मेरी कलाई से ….
तेरे हाथ की..
अब तक एहसास भी नहीं गए
मेरे ज़हन से ...
तेरे जज़्बात के ...
अब तक ख़्याल भी नहीं गए
जो लम्हे साथ बिताए...
उन लम्हों के निशानात भी ...
बिखरे पड़े हैं ज़हनी परतों में.!!
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