हर एक रास्ता , हर एक गली ,
मानो हमारे मिलने की,
दुआ करती हैं...
पूरा आसमान , ये जताने में लगा है,
मानो की तू यही कही,
हमारे बिलकुल नजदीक ही हैं...
ठंडी चलती हवा, ये मेहसूस करवा रही है,
मानो तेरे हाथो में जो कॉफी मग है,
ये खुशबू उसी की हैं...
सूरज की किरणों की, गरमाहट मानो,
ऐसा मेहसूस करवा रही है कि,
तेरे हाथो में ही हमारा हाथ है...
चांद को तो हम तेरी ही, छवि समझ ने लगे,
उसे मुस्कुराता देख अब,
हम भी मुस्कुराते है...
बारिस की बूंदे जो, हम पर बरसी तो,
लगा कि तू हमे अपने,
बेसुमार प्यार भीगा रहा है...
ये सब तो हमे मिलवाने में लगे है,
और एक तू है की,
हम से अक्सर मुंह मोड़ें जा रहा है...
हीमाश्री...
"राधुं"
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