शिक्षा ग्रहण करने की उम्र में सड़क किनारे पेट की भूख मिटाने के लिए हम अक्सर बच्चों को कुछ बेचते या कूड़ेदान में से उपयोगी वस्तुओं को तलाशते देखते हैं।यथासंभव हमें उनकी मदद करनी चाहिए।पर कुछ लोगों की नजर उन बच्चों के ऊपर जाती ही नहीं है या देखकर नजरअंदाज कर देते हैं।क्या इंसानियत की यही परिभाषा है?-कुमार संदीप