My New Poem ....!!!!!!
उसने हमारे ज़ख़्मों का कुछ
यूँ इलाज किया,
मरहम भी लगाया तो खँजर
की नौंक से
अरमान दिल में तड़पते तो थे
बे-रुख़ी को पर
उसने हवा में उड़ाया हंस के
डंके की चोट पे
आरज़ूऔ ख़्वाहिशों का तो काम
ही है मजबूर करना
पर उन मजबूर हालातों में भी
उसने रिश्ता निभाया
अपनी ओर से
सब को जाना है एक दिन यहाँ से
एहसास तो है पर
प्रभुजी के चरणों को छूता कौन है
सच्चे दिल से