पाना क्या है और, खोना भी क्या है,
बस हयाति का अपने आपमें होना है।।
बहुत दुर चले गए थे,ना जाने क्यु हम,
फासला दुरियों का , फकत मिटाना है।।
सफ़र हैं परिंदें की, आसमान मे गजब,
घौंसले मैं शाम को, वापस ही आना है ।।
मुसाफ़िर है मंजिल ए महोबत दुनियामें,
छोड़ कर मुसाफ़िर खाना, खूद जाना है ।।
आनंद मिलता है ज़िंदगी बेखुदी छोड़कर,
तलाश ए दिल फरिस्ता मिजाज पाना है ।।