अलग अंदाज था, दिल भी था!
उसी अंदाज मे,उसी दिल से बात बताई होती!
हम भी आजमा के देखते तुजे!
कठोर दील के प्यार की चीखे महसूस करते!
सब्द छोडो नजर से देखो!
बार बार देखती तुम्हारे लीये!
बया नही,नजरो से कीया होता!
प्यार के नाम पर मुहर हम लगाते!
दिलकी धडकन सुनती होती!
तुम्हारा किस्सा सौरभमय बनता!