आंखों में सो सवालों के साथ आईं थीं वो,
हजारों का तो जवाब भी लाई थी वो
उन्ही आंखों में दरीया भी भर आई थी वो,
बस पलकें झुका ते ही दरिया बहाने वाली थी वो
अपने होंठों को तो जेसे रिश्वत देके आई थी वो
,अगर कुछ बोले तो अपने ही दरिया में डुबो देगी वो,
हम तो खड़े थे वहां जहां अपनी खुशबु फेला के गइ थी वो
मालूम तो तब पड़ा जब हमारा हाल कुछ अपने सा कर गई वो
तब पता चला असल में अपना हाल हमें देने आई थी वो
Dip@li