थक हार कर जिंदगी से,
मेरी आंखे एक तुझे ही देखना चाहती है...
पर तू जब ना दिखे तो ये,
तेरी ही सिकायत एक तुझ ही से करना चाहती है..
यूं तो पास कई लोग है,
पर यह रूह एक तुझ ही से रूबरू होना चाहती है...
भीड़ या सन्नाटो से परे,
यह बाहे एक तुझे ही गले लगाना चाहती है...
अब कुछ कहना सुनना नहीं है,
बस आंखों ही आंखों में सारी बात करना चाहती है...
हीमाश्री...
"राधुं"
#my_words ...