ऐसा है के अब पहले जैसा नहीं ...
दिल तो है लेकिन उसमें कोई रहता नहीं ..
ख़ाली पड़ा है उसके जाने के बाद से वीरान-सा
धड़कन तो है लेकिन वो मेरी नहीं
सुना है किराएदार घूम रहे है बस्ती में तेरे बहुत
मेरा मकाँ भी ख़ाली है ...कई सदियों से कोई रहता नहीं
अगर कोई मिले तुझ -सा तो मेरा पता देना
वरना ये मकाँ अब हर किसी के लिए रखा नहीं ..,...
ऐसा है के अब पहले जैसा नहीं .....।
- A A राजपूत ‘अक्श’