यहाँ मौसम बदलते रहते है लोगो की तरह ,
हवाएं थम जाती है , लोग लोगो को देखकर ही मुड़ जाते है ,
उसके मकां तक आते देखकर हमे ,
वो बरखुरदार अपने बिलो में अंदर तक सिकुड़ जाते है ,
यहाँ कोई सामना तक नही करता हमारा बस्ती में
तो कुछ सलाम कहकर पीछे मेरे लाइन में जुड़ जाते है ,
तुम्हारी रियासतों के किस्से हमें मत सुनाओ ,
हमारे कारनामे सुनकर अच्छे अच्छो के होश उड़ जाते है ,
गुरुर न कर अपनी अमीर पैदाइश पर , इशारे में यहाँ बादशाहत गिर जाती है ,
लोग इस कदमो में अपने अपने ताज तक छोड़ जाते है...
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©kirdar