कृष्ण
कारावास में जनम , ऐसा भी क्या करम
हर पल मौत से लड़ा , पल पल अस्तित्व से लड़ा
घर घर से मक्खन चुराया , दोस्तों को भी खूब खिलाया
जशोदा को मुँह दिखाया , जिसमे पूरा ब्रह्माण्ड समाया
राधा के संग इश्क़ जताया , गोपियों संग रास लड़ाया
वहा प्रकृति में भी प्रेम समाया , क्या सुन्दर माहौल बनाया
द्रौपदी को वस्त्र दिया , पांडवो को सस्त्र दिया
अर्जुन को उपदेश दिया , युद्ध का आदेश दिया
युद्ध में रण छोड़ा , कभी बोल वचन तोडा
गीता का ज्ञान जोड़ा ,अर्जुन का मोह तोडा
चारो और लहू बहाया , धरती को भी लाल बनाया
आकाश को भगवा बनाया, विजय का परचम लहराया
कर्म का राज़ बताया , भक्ति का मार्ग बताया
मनुष्य का गुण बताया , धर्म का जीवन बताया
कर्म फल का त्याग सिखाया , वियोग में भी योग बताया
परिवर्तन का स्वीकार सिखाया , ईश्वर का भी आकार दिखाया
दुर्गुण का दुःख बताया , सद्गुण का सुख बताया
हो रहा उसे अच्छा बताया , वर्तमान को ही सच्चा बताया
पेंच और प्रपंच का नायक , राजनीती का खलनायक
एक मात्र पूर्ण पुरुष , हर युग का युग पुरुष
कविता के रचनाकार:
वेद चन्द्रकांतभाई पटेल
२४,गोकुल सोसाइटी ,
कड़ी ,गुजरात Mob.-9723989893