🌹🌹 वापसी🌹🌹
सुभाष पर वज्रपात हुआ
नशे को जीतने का भ्रम टूटा
जब 17 साल का बेटा और 15 साल की बेटी को ड्रिंक करते देखा और साथ में उनकी बातें सुनकर शर्म से पानी पानी हुआ।
बेटा कह रहा था अपनी बहन से कि तुम्हें नहीं मालूम मैं तो पापा द्वारा किए जुल्म को, गालियों और तकलीफ को भुलाने उनकी ही शराब की बोतल से निकालकर पीता हूं और उसमें पानी मिला देता हूं ताकि पापा को पता ना चले।
बहुत दिनों से सुभाष की समझ के बाहर हो रहा था कि-------
वह तो बरसों से शराब पीता आ रहा है, पर ये अचानक उसे नशा चढ़ना क्यों कम हो गया है।
वह खुश हो रहा था कि उसने नशे पर विजय पा ली है, अब वो जितनी जी चाहे पी ले उसे नशा नहीं चढ़ेगा।
और यही बात दोस्तों को बताई----
आज 31 दिसंबर नए साल के स्वागत पर घर की बजाय दोस्तों के साथ होटल में जश्न मनाना बेहतर समझा।
पर यह क्या जैसे हीआज की शराब हलक के नीचे उतरी सर चढ़कर बोलने लगी।
दोस्तों के बीच हंसी का पात्र बन गया।
खैर-------
देर रात घर पहुंचने पर लड़खड़ाते हुए दरवाजा आहिस्ता से अपने पास की चाबी से खोला ताकी दोनों बच्चे उठ ना जाएं ,पत्नी तीन-चार दिन से अपनी मां के यहां गई हुई थी।
डगमगानते कदमों से बेटे के कमरे के पास उस के कदम ठिठक कर रुक गए-------
अंदर का दृश्य देख उसका नशा काफूर हो गया-----
बच्चों को अपनी ही लाई बोतल से ड्रिंक करते देख और नशे की हालत में उसकी खुद अपनी सभी बुराइयों व बच्चों पत्नी पर किए जुल्म की दास्ताने सुन उसका कलेजा फटना चाह रहा था।
बच्चों के अनुसार वह एक अच्छा पिता तब होता था जब वह दिन में ड्रिंक नहीं करता था तब पूरे परिवार का खयाल रखकर उनकी सभी फरमाइशो को भी पूरी करता था पर रात को नशे में अपने किए सब कामों पर पानी फिर देता था।
बच्चों पर भी नशा हावी था ,और वो दोनों एक अच्छे पापा की ख्वाहिश पर रो भी रहे थे।
आत्मग्लानि से भरे उसके दिल और आत्मा ने उसे धिक्कारा।
अचानक दरवाजा खोलो अंदर दाखिल हुआ----
पापा को सामने और स्वयं का इस प्रकार ड्रिंक करते पकड़े जाने पर थरथर कांपने लगे कि अब फिर पापा की मार खानी पड़ेगी।
पर यह क्या---
शराब की बोतल की जोर से टूटने की आवाज आ------ई
दोनों बच्चों को अपने सीने से लगा सुभाष फूट-फूटकर रो पड़ा-----
बस अब और नहीं अब मैं इस परिवार में एक और सुभाष नहीं बनने दूंगा।
अगर मेरे पिता ने भी कभी मुझे मारा या समझाया होता तो तुम्हारा पापा ऐसा कभी नहीं होता।
मेरी प्यारी बच्ची तुमको पीते देख मैं आज इतना शर्मिंदा हूं जिसे मैं बयान नहीं कर सकता एक बाप के सामने बेटी का यह रूप कोई भी पिता नहीं देख सकता।
मुझे माफ कर दो
माफ कर दो।
डॉ प्रियंका सोनी "प्रीत"
जलगांव