नए साल के नए तराने रूठों को भी चलो मना लें
पूरी हों सबकी अभिलाषा संबंधों की सुमधुर भाषा
सबके मन में उपजे करुणा स्नेहसिक्त जन-मन हर्षा लें ---
रूठों को भी चलो मना लें ---
प्रश्न यहाँ पर बहुत विकट हैं चारों और घिरे संकट हैं
मुस्कानें किसमें बाँटू मैं कोई तो झोली फैलाए
स्नेह-प्रेम से गले लगाए ,मन की भाषा से हर्षा लें ---
रूठों को भी गले लगा लें ---
मन प्यारा हो ,जग हो प्यारा गल जाए तम ,हो उजियारा
साँस साँस स्नेह बसा हो प्रेम -भाव सबमें सरसा हो
उजियारे की ज्योत जगा लें ----रूठों को भी चलो मना लें -----
प्रणव भारती