यही देवभूमि है
यही, जन्म के लिए,
यही मृत्यु के लिए
यही मोक्ष के लिए, उठी हुई भूमि है।
सारी धरा विशुद्ध है,
इसी प्यार के लिए
इसी प्रकाश के लिए,
यही मनुष्य का उपासना शिखर है।
माँ तुल्य इसी को
कहा गया, सुना गया,
इसी को स्वर्ग के समान्तर माना गया,
इसी को गीता में कर्म भूमि कहा गया।
**महेश रौतेला