बातों का क्या है ...वो तो बस लफ़्ज़ों की काया है ,
सुन मेरे आँखो में बहते नीर को ...बस वही असली गाथा है
यू तो मैंने अपने अंदर कई शक्स छिपा रखे है ,
मुझको देखना भी क्या देखना है ..वो तो बस दिखावा है,
देख मेरे अंदर उठते एहसास-ए-मोहब्बत को ..बस वही असली मेरा ठिकाना है....
बातो का क्या है ....वो तो बस लफ़्ज़ों की काया है.....
-Akashsingh