My New Poem ...!!!
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समझदार इंसान वो नहीँ जो
ईट का जवाब पत्थर से देता है
समझदार इंसान वो होता है *
जो फेकी हुई ईट से हँसते हूँए
अपना आशियाँना बना लेता है *
नज़र बदलते ही नज़ारे बदलते है
नाकामीको कामयाबी बना लेता
भँवर-ए-तुफाँसे साहिल पा लेता
हस्ती-ए-कश्ती-राह बना लेता है
दिली-सुकुँ रुँह-ए-मुकित पाता।
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