My New Poem ...!!
बंद लिफाफे में रखी
चिट्ठी सी है ये जिंदगी..
पता नहीं अगले ही पल
कौन सा पैगाम ले आये
हँसी से भरे ख़ुशनुमा पल
कब गमौ का सैलाब लाये
मासुम-सी हसरतों को कब
मँझधारें मंझिल मिल जाये
कहने को तो घर की लक्ष्मी
उम्मीद हर कोइ बस ये लगाये
जहाँ में आनेवाला मेहमान
कब नस्लें वारिस हौ जाये..!!!!!
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