दुनियां की हर माँ को दिल से सलाम करता हूँ,
और मेरी ये कविता हर माँ के नाम करता हूँ। ~Tarak
काश सोते वक्त पास आती मां,
प्यार की लोरी सुना जाती मां,
पहला चेहरा देखता मां का,
प्यार से सुबहा उठा जाती मां,
नखरे करता उठते वक्त में,
दुलार से चाय दे जाती मां,
जाता फिर स्कूल जब भी में,
काला टीका लगा जाती मां,
मां दो रोटी ही देना खाने में,
चार मिलता जब खाना खाता,
दो रोटी खा भूखा ही रहता,
ये सब कैसे जान लेती मां,
अगर दिल दुखाया कभी मां का,
मांग लो माफी अभी समय हैं,
क्षमा याचना करने से ही पहले,
बच्चों को माफ कर देती मां,
आज सौ रुपए भी कम पड़े,
तुजसे मांगा एक रुपया बड़ा था,
आज सब खड़े है मेरे आस पास,
फिर भी लगा जैसे अकेले खड़ा था,
तू है तो भरा मेरा संसार हैं,
जीवन मे खुशियों का संचार हैं,
कह दिया अब कुछ नही कहना,
मां सदा मेरे पास ही रहना।