*प्रातः वंदन,,,,🙏*
*क्या प्रकृति की शक्तियां हमारी*
*मदद करती हैं? हां, जरूर*
*जरूर करना चाहती होगी*
*बशर्तें हमारी सोच, व्यवहार*
*ओर वर्तन सकारात्मक हो*
*यदि आंखें प्रतिदिन ब्रह्म मुहूर्त में*
*अर्थात् रात्रि 3 से 5 के बीच*
*अचानक ही खुल जाती हैं तो*
*समझें जाएं की प्रकृति हमारे साथ हैं*
*पूर्वाभास, पारिवारिक प्रेम खुली हवा में*
*राहत की सांस ले सकते है तो*
*समझें कि प्रकृति हमारे पास पास ही है*
*हमें समझना होगा कि*
*हमारे हर कार्य को प्रकृति निहार रही है*
*और उसके प्रति प्रतिक्रिया भी करती है*
*हमें सदैव ध्यान रखना चाहिए कि*
*प्रकृति के साथ जुड़े रहें....*
Good morning.................. Jay shree krishna🙏🏻💐