आज प्रस्तुत है अपने सतना की पावन माटी के बघेली महाकवि स्व.सैफुद्दीन सिद्दीकी "सैफू" साहब की सन् 1978 मे लिखा कविता संग्रह "दिया बरी भा अंजोर" जिसे संस्कृति विभाग मध्य प्रदेश शासन का "दुष्यंत कुमार पुरस्कार" प्राप्त हुआ था।
एक कविता-
"आँसू न बहाव महतारी"
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ढुकुर ढुकुर आंसू न बहाव महतारी।
फिरी तोर बेरा, अई पुन के देवारी।।
कउनव फिरै नंगा,कउनव पहिरे लगोटी।
कउनव मरै भूखन,कउनव पाय जाय रोटी।
कउनौ ताकै गोरू,कउनव लये फिरै झोरी।
कउनव काटै खीसा,कउनौ करत रहै चोरी।
कोऊ राखे कथरी,ता कोऊ बिछा पइरा।
कोऊ परा भुई मा,कोऊ गड़ा म इरा।
कोऊ फिरै झउवा भर लार चिचुआये।
कउनौ सब देहे मा,रोघट जमाये।
कोऊ बेराम परा,खटिया का सेबै।
कोऊ उपास कये,आपन दिन खेबै।
कोऊ रिन काढ़,आपन साज बिकन डारै।
कोऊ महगाई मा,आपन जिउ डारै।
सगले लड़िकन मा,परीत तोर भारी।
ढुकुर ढुकुर आंसू,न बहाव महतारी।।
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तोरेन भे लक्षिमन,तोरेन भे राम।
तोरेन बलदेऊ औ,घनश्याम।
तोरेन गुरू नानक,औ बुद्ध भगमान।
करन हरिश्चंद्र अस,दानी जुहान।
ताम्रध्वज ध्रुव औ,प्रह्लाद तै पाये।
भरत अभिमन्यु अस,लडिका खेलाये।
तोहिन का जमुना मिली,तोहिन का गंगा।
तोरेन कैलास मा,शंकर फिरैं नंगा।
तोरेन घर काली के खप्पर देखान।
तानसेन तानी,अलापिन है तान।
तुलसी रामायन लिखिन,सूर सूर सागर।
गिरधर रहीम भूखन,पद्माकर।
लक्ष्मी और सारसुती के,तै भंडारी।
ढुकुर ढुकुर आंसू ,न बहाव महतारी।।
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तोरेन लड़िकन से हार मानिगा सिकंदर।
राना शिवाजी रहे,पृथ्वीराज अकबर।
अर्जुन औ भीम रहे,भीखम औ भामा।
हियै इमाम बकस,हियैं रहे गामा।
हियैं रही लक्ष्मी औ हियैं मीराबाई।
चांद बीबी हियैं रहीं,हियैं पन्ना दाई।
हियैं रहे रनमत औ नाना अस बागी।
कफ्फन गठिआय,पदुमधर भै है बैरागी।।
गांधी जमाहिर का राजा पछिआन।
गोरा सब भाग दिहिन,लै लै परान।
फेर खोर खोर फहराइगा तिरंगा।
होइगै सुराज बही,गड़हिन मा गंगा।
अपने देश राज के,तै पुनिके अधिकारी।
ढुकुर ढुकुर आंसू, न बहाव महतारी।।
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सबका समेट तैं,करेजा लगाय ले।
कइके लोलार खूब,मन भर खेलाय ले।
सबका दे ओढ़ना सबका दे रोटी।
फिरै न अड़ारन अस,पहिरे लगोटी।
कउनौ टंसेरी कइ, झगरै न पाबै।
जुवां बिआं चोरी मा,बगरै न पाबै।
पइसरम करै खांय,सबका खबामैं।
जोत बोय खेत मा सोना,उपजामै।
जात पात छुआछूत, सबका बिसराय के।
काम करैं सगले जन,कांधा मिलाय के।
छोट बड़े सब जन,मरजादा सकेलै।
बड़े बड़े बिपत के,पहारन का ठेलैं।
"सैफू" कहैं कबहू हम,हिम्मत न हारी।
ढुकुर ढुकुर आंसू न,बहाव महतारी।।