My New Poem...!!!
खुद को बेहतर बनाने के लिए हर दीन
में बस इतना सा काम करती हूं।
छोड़ दुनियादारी, सही सहयोग से
हर एक नेक काम अंजाम देतीं हूं।
ना ईर्ष्या ना द्वेष भाव करती किसी से,
दिल-से सबका मान-सम्मान करती हूं।
सुकून की नींद नसीब हो हर रात में,
बस इतनी मेहनत सुबह शाम करती हूं।
घरेलू बाज़ारी रसोई के अलावा रिश्तों की
ज़िम्मेदारी निभाते हूएँ जीवन व्यतीत करती हूँ ।
प्रभु के बनाए इस जहाँ में नारी धर्म निभा के
हर दौर में हर दर्द सह कर भी ख़ानदान बढ़ाती हूँ।
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