एक जख्मी परिंदे की तरह जाल में हम हैं
ऐ इश्क अभी तक तेरे जंजाल में हम हैं
हंसते हुए चेहरे ने भरम रख्खा हमारा
वो देखने आया था किस हाल में हम हैं
अब आप की मर्जी है सम्हाले न सम्हाले
खुशबू की तरह आपके रुमाल में हम हैं
एक ख़्वाब की सुरत हि सही याद है अब तक
मां कहती थी ले ओढ़ ले इस शाल में हम हैं
"मुनव्वर राणा"