मान ली हार
थक गए तेरी राह निहारते हुए, यह उदास नैन
अब काटते नहीं कटते जुदाई के, यह दिन रैन ;
याद में तेरी, होने लगे है हम भी अब बेचैन ।
लायक शायद नहीं थे हम, पाने के लिए तेरा प्यार;
कर न सके समझौता, क्यू की प्यार नहीं है व्यापार
सालों के इंतज़ार बाद, अब मानली है हमने हार
आश थी हमें, आएगा एक दिन तु जरूर;
विश्वास भी था, और था हमें, हमारे प्यार पे सुरूर
जल्दबाजी नहीं थी हमारे प्यार में, न था कोई गुरूर ।
पर कन्हाई, तुझे तो कभिभी, न आयी मेरी याद
बेचारे गोप गोपियों ने भी, खूब की तेरी फरियाद ;
कान्हा तु तो राजा बनके कर गया हमें बरबाद ।
सालों के इंतजार के बाद, हार गया मेरा प्याय;
कान्हा, आज तेरी राधिका ने मान ली है हार
तु भी कुबूल कर ले, के आधा अधूरा रह गया हमारा यह प्यार।
Armin Dutia Motashaw