My New Poem...!!!
जब वक़्त 🧭ही ऑंखें फेर लेता है
तब कुत्ता भी 🐅शेरको घेर लेता है
जब 🔮ग़हो की चाल रुख़ बदलती है
तब बाहोश बंदेके भी हालात बदलते है
वक़्त की देहलीज़ पे ईमतेहाँ रब लेते है
धीरजकी दौर जो एसे वक़्त में थामे है
वक़्त भी उनके लिए करवट बदलता है
धूप-छाँव ही तो ज़िंदगी का हिस्सा है
बात तो सच है कि इन्सान गर चाहे तो
बुरे वक़्त⏱का भी रुख़ बदल सकता है
आजीजी से प्रभुको राज़ी कर सकता है
✍️✍️🌹🌸😇🙏😇🌸🌹✍️✍️