*प्रातः वंदन* 🙏🏽
*क्रोध सुख का सबसे बड़ा शत्रु हैं*
*क्रोध मनुष्य को विचारशून्य*
*एवं शक्तिहीन कर देता है*
*जिस तरह तूफान का प्रबल वेग*
*बाग-बगीचा को झकझोर कर*
*उनका सौंदर्य नष्ट कर देता है,*
*उसी तरह क्रोध का तीव्रतम*
*आवेग ब्यक्ति के तन-मन मे*
*तूफान पैदा कर उससे*
*कई अनर्थ करवा डालता है*
*क्रोध की अवस्था में मनुष्य के*
*भीतर एक प्रचण्ड आवेग*
*समाहित हो जाता हैं*
*परंतु,,, क्रोध उतरने पर*
*आवेग की अवस्था मे*
*किये गए कर्मो पर*
*पश्चात्ताप कर वह लंबे*
*समय तक दुखी होता रहता है*
*उलझनों का बोझ दिलसे उतार दो*
*बहुत छोटी है जिन्दगी*
*हँस के गुजार दो*
Good morning
Jay shree Krishna🙏🏻💐