My is Poem ...!!!
हर हाल में मुस्कुराना आदत है जनाब,
हम कभी उदासीऔको मुँह नही लगाते
अक्सर खो कर ही पता चलती है क़ीमत पास हो तब तक अहसास कहाँ होता है
कहा मुझसे गया था कि मेहनत कर ले
मैंने तो नुक़्ता पलटके मोहब्बत कर ली
आसार बद-गुमान मौसमोंके आज टेक्नोलॉजीकी ईज़ादोंसे पता चल जाते
पर बंद-गुमान रक़ीबोंके गुमशुदा ख़्यालोंको आज-तक कौन समझ पाया हैं
सियासती चक्कीके भँवरोंमें पीसकर भी आह तक ना करें एसी दौर-ए-क़ौम की जवाँ-मर्द-सी ज़िंदादिली को सलाम।
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