My New Poem ...!!!
कोई महफ़िल से उठकर जा रहा है
सँभल ऐ दिल बुरा वक़्त आ रहा है
वक़्त हाथोंसे पल पल फिसल रहा है
किरदार गुमशुदगीमें खोए जा रहा हैं
अच्छाइयाँ ओझल,हयात गुमराह है
उजड़ रही इज़्ज़त मासूमियत लिलाम
सरेआम, इन्सान बदहवास हो रहा है
नाज़ुक कच्चे धागे-से इस वक़्त के दौर
में मिज़ान में ख़ास बंदे दट़के अड्डे हुए हैं
प्रभु की नज़र में खुद को जकड़े हूए है
इनही हस्तीसे निज़ाम-ए-जहाँ चलत हैं
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