*अजीब खेल है उस परमात्मा का*
*लिखता भी वही है*
*मिटाता भी वही है*
*भटकाता है राह तो*
*दिखाता भी वही है*
*उलझाता भी वही है*
*सुलझाता भी वही है*
*जिंदगी की मुश्किल घड़ी में*
*दिखता भी नहीं मगर*
*साथ देता भी वही हैं*
*? सुप्रभात?*
जय श्री राधा माधव आपका दीन मंगलमय रहे,,,