सारी रात हम उसकी राह देखते रहे...
उम्मीदों के पत्थर गम की नदी में फेंकते रहेे...
एक पल को भी आंख ना सोई...
सोने से उन्हें रोकते रहे...
देखा सुबह हो गई, जब रोशनी हुई कमरे में ,
दिल ने कहा क्या आ गया वो?
मैंने कहा नहीं तो वो हंसकर बोलाा,
जो यादों में सारी रात साथ था...
उसकी राह तुम क्यों देखते रहे...