नहीं चाहते वे
कोई उनसे पूछे
क्या हो रहा है
और क्यों?
नहीं चाहते वे
उठे कोई आवाज़
अन्याय, और मनमर्ज़ी के विरुद्ध।
नहीं चाहते वे लड़ो तुम
अपने हक़ के लिए और
नहीं चाहते वे कोई बने एकलव्य
जो अर्जुन को पछाड़े।
नहीं चाहते वे
तुम निकलो अपनी छोटी सी दुनिया से
और नाप लो आकाश और
खड़े हो जाओ उनकी छाती पर
मूंग दलने के लिए।।
वे चाहते हैं
सिर्फ मूकदर्शक जनता
पिछलग्गू सियार
और मूर्खों की टोली
जो हाँ में हाँ मिलाए
साबित कर दे जो
पौधों के नाश को
वन हित में।।
- सिराज अंसारी