"विकलांगता अभिशाप नहीं"
**********************
वीर तू ये जान ले दूर है तू हर कमी से,
ठान ले गर तू तो छू ले आसमाँ को इस ज़मीं से।
हौसला गर हो बुलंद तेरा तो फिर क्या बात हो,
तेरे आगे पर्वतों की, सागरों की क्या औकात हो।
बात हो हाकिंग की, केलर की, या हो फिर नैश की,
हर कमी से पार पा के हैं मिसालें पेश की।
तू न घबरा इस कमी से ये तेरा अभिमान है,
तेरे प्रयासों से ही बनती सभी की शान है।
है कमी कोई तो क्या पर हौसला तो है सही,
जीतने का दम है तुझमें हार तेरी है नहीं।
पूरे होंगे तेरे सपने कोशिशों से ही तेरी,
ठान ले गर तू तो कोई चीज़ नामुमकिन नहीं।।
-सिराज अंसारी