अक्सर खामोश होने पर
ध्वनि धीमी पड़ने लगती है
कई खराश करके भी
आवाज सध नहीं पाती
फिर
लुढ़क कर गिरती है
जैसे कांच का कोई गोल बर्तन
बिना आधार के होने पर ,
छन से गिर जाता है
या
बिल्कुल ऐसे जैसे बरसों पुराना जंग लगा
कोई ताला जिसमें कई बूंद
तेल डालने पर भी
टस से मस नहीं होता
तब आवाजें अपना
दम घोंटकर आत्महत्या
कर लेती है
और
उसके मरते ही देह
सिर्फ हाथ पैरों से घसीटकर
चलने वाला यंत्र
रह जाता है