Hindi Quote in Poem by Krishna Chaturvedi

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आख़िरी सलाम

एक ललक थी,
उनको देखने की,
अरसा हो गया था,
कदम अपने आप उनके घर के तरफ निकल पड़े,
दरवाजे पर दस्तक दी,
दरवाजा खुला और वही चेहरा सामने आया,
दिल को बड़ी ठंडक मिली,
उनका चेहरा भी चमक उठा,
"आखिर तुम आ ही गए वापस"
ये बोला और मुस्करा दिया उनने,
फिर मैंने कहा,
"नहीं कुछ तो था जो मुझे खा रहा था,
अंदर ही अंदर मुझे खोखला कर रहा था,
आखिरी सलाम बोलने आया हूं,
आप खुश हो और मै भी ये बताने आया हूं,
ढूंढोगे के मुझे किसी कोने में कभी भी,
जरूर मिलूंगा,
पर अब बस एक मैत्री की भाव से मिलूंगा,
ये बोलने आया हूं,
अब ब्रेक अप को बैध करने आया हूं,
म्यूचुल नहीं अब लड़ के अलग होने आया हूं,
यही रास्ता है सही आगे बढ़ने का,
तुम्हे और अपने आप को बचाने का,
ये समझाने आया हूं,
यादें रहेंगी हमेशा मेरे साथ,
पर अब और नहीं ऐसे चलेगा,
ये बताने आया हूं,

आज आख़िरी सलाम कहने आया हूं ।"
©krishnakatyayan

Hindi Poem by Krishna Chaturvedi : 111273479
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