बगियाँ बीच जानि न दइहै राम जी बिनति सुनहुँ।
दल फूल तोड़ी हम लईहै
राम जी विनती सुनहुँ।।
कोमल चरण कमल बिनु पनहीँ पंखुड़ि पायन गड़ी जइहै।
राम जी विनती सुनहुँ।।
बगियाँ बीच.......
तजि तजि सुमन मधुप मतवारे मुख पंकज पे मड़रइहैं।
राम जी विनती सुनहुँ।।
बगियाँ बीच.....
चरण छुअत उड़ी गई शिला प्रभु कर छुअत बिटप उड़ी जइहै।
राम जी विनती सुनहुँ।।
बगियाँ बीच......
सर सो पान शिला पद परसद प्रभु सब नारी बनीजैहै।
राम जी विनती सुनहुँ।।
बगियाँ बीच...
जब बोलहुँ की सिय जु की जय तबही प्रभु परिसही पाइहैं।
राम जी विनती सुनहुँ।।
बगियाँ बिच...
बिहँसत बन्धु सुनत दोउ बतियाँ भक्त दरस कब पाइहैं।
राम जी विनती सुनहुँ।।
बगियाँ बिच...