बाहर बाहर हँसते हँसते अन्दर अन्दर रोते है..............
पहरों पहर जागते है फिर पहरों पहर सोते है...............
बंद आँखों में पलते सुहाने सपने धुंधले धुंधले
रात रात पाते है और फिर सहर सहर खोते है................
मिलते हो तुम खयालो खयालो हमको अक्सर
हादसे दिलखुश ऐसे साथ हमारे अक्सर होते है...............
साथ रहे सफ़र में पर हमसफ़र नहीं रहे तुम
सफ़र सफ़र में हमसफ़र बस हमसफ़र होते है...............
धूप धूप चलते चलते या छाँव छाँव ठहरे ठहरे
रात रात जागते जागते दोपहर दोपहर सोते है................
बातों में बाते उसकी और यादों में उसकी यादें
भीगी भीगी आँखों में गुजरे गुजरे मंजर होते है..............
बरसे बारिश यादों की तब खिले कहीं हँसी हँसी
बहुत आबाद वीरान “माहीं” जैसे खँडहर होते है.............