मां निषाद प्रतिष्ठां त्वमगमः शाश्वतीः समाः।
यत्क्रौंचमिथुनादेकम् अवधीः काममोहितम्" ||
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धरती को प्रणाम ,आकाश को प्रणाम,सूर्य को प्रणाम,चाँद तारों को प्रणाम,नदियों को प्रणाम,अग्नि को प्रणाम , ब्रह्माण्ड को प्रणाम, दसों दिशाओं को प्रणाम,आदि कवि वाल्मीकि को प्रणाम,आदि आशु लेखक गणेश को प्रणाम,साहित्य कला के ईश्वर शिव को प्रणाम .