सुदंर कविता ..
विषय .बिछड़ना ..
देखा हैं मैंने लाखों बार आपको ,फिर भी दिल इतना बेकरार क्यूं हैं ।
आँखों में बसाया है आपको ,फिर ये निगाहें इतनी व्याकुल क्यूं हैं ।।
गीतों में बसाया है आपको ,फिर ये दिल आपको सुनने को व्याकुल क्यूं हैं ।
सपनों में सजा लिया है आपको ,फिर ये दिल बार बार दीदार को व्याकुल क्यूं हैं ।।
आपको अपना बना लिया है ,फिर भी सात जन्मो की मिलने की आश क्यूं हैं ।
तुम इस जन्म में मिलोगे जरुर ,फिर भी हे गिरधर तुम से बिछडने का डर क्यूं है ।।
बृजमोहन रणा ,कश्यप ,धंबोला जिला डूँगरपुर राजस्थान ,हाल .अमदाबाद ,गुजरात ।