सुदंर कविता ..
विषय .चाय ।
चाय कलियुग की महारानी मानी जाती हैं ।
चाय बिना किसी की सुबह नहीं होती हैं ।।
चाय के दशर्न से आठो धाम के दशर्न हो जाते हैं ।
चाय के आगे छप्पन भोग भी फीके लगते हैं ।।
चाय महारानी के दशर्न हर जगह हो जाते हैं ।
चाय बिना मेहमान बाजी फीकी लगती हैं ।।
सुबह मानव ईश्वर के दशर्न नही करें तो चल सकता हैं ।
पर चाय महारानी के दशर्न बिना नही चलता हैं ।।
चाय बिना यह जग सूना सा हर किसी को लगता हैं ।
चाय की चुस्की हर कोई लेना ही चाहता हैं ।।
चाय के लिए हर कोई लालायित सा दिखता हैं ।
चाय की महिमा हर कोई गाता हुआ दिखाई देता हैं ।।
चाय आजकल हर धर की पहली प्राथमिकता हो गयी हैं ।
चाय सर्वव्यापी ,सर्वप्रिय ,प्राणप्यारी सी हो गयी हैं ।।
बृजमोहन रणा ,कश्यप ,धंबोला जिला डूँगरपुर ,राजस्थान
हाल .अमदाबाद ,गुजरात ।