# Gandhigiri
प्राकृतिक वातावरण से आच्छादित मेरे घर में अनेक जीव-जंतु गाहे-बगाहे प्रवेश करते रहते हैं। जैसे साँप, साँप की मौसी (बामनी), गिरगिट, काँतर, केंचुएँ, आदि। उन्हें देख कर घबराहट होने पर भी उन्हें मारने के स्थान पर उनके जाने की प्रतीक्षा करती हूँ। कई-कई घंटे बीत जाने पर भी उनके नहीं निकलने पर, उन्हें बाहर निकालने का प्रयास करती हूँ, क्योंकि भारतीय संस्कृति संपूर्ण चराचर जगत के धड़कते प्राणतत्व की रक्षा की शिक्षा देती है, जो अहिंसा का मूलाधार होता है और गाँधीगीरी से अभिप्राय भी अहिंसा अपनाना ही होता है। यह घर की चारदीवारी के अंदर की गाँधीगीरी है।