सुदंर शायरी ..
मेरा दिल का कोरा कागज ।
पडा है अब तलक बंद ।
पता न कब लिखने आएगा ।
कोई प्यार का छंद ।
...................................
इस दिल को आईना दिखाया न कीजिए ।
आँखों में हर किसी को बसाया न कीजिए ।
दिल लगी दिलों से यो ही न कीजिए ।
लिख कर नाम दिल पर मिटाया न कीजिए ।।
बृजमोहन रणा ,कश्यप ,धंबोला ,हाल .अमदाबाद ।